इस्लामी क्रान्ति के विरष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा इस्राईल की सुरक्षा को अपने लिए लाल रेखा की संज्ञा दिए जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आज तेहरान में पांचवें अंतर्राष्ट्रीय फ़िलिस्तीनी इंतेफ़ाज़ा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति का कहना है कि इस्राईल की सुरक्षा उनके लिए लाल रेखा के समान है। यह लाल रेखा किस लिए खींची गयी है? क्या अमरीकी राष्ट्र के हित में या ओबामा की दूसरे राष्ट्रपति काल को सुनिश्चित करने हेतु पैसों और ज़ायोनी कंपनियों के समर्थन की आवश्यकता के लिए खींची गयी है? वरिष्ठ नेता ने कहा कि ओबामा और उनके जैसे लोगों द्वारा खींची गयी इस लाल रेखा को जागरूक मुसलमान राष्ट्र पार कर जाएगा। आयतुल्लाहिल उज़मा सय्यद अली ख़ामेनई ने कहा कि इस्राईल के लिए वास्तविक ख़तरा मुसलमान राष्ट्रों का संकल्प है जो नहीं चाहते कि अमरीका, योरोप या उनके पिट्ठु उन पर शासन करें। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों को इस्राईल का समर्थन रोकना और फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को मानना होगा वरना निकट भविष्य में भीषण तूफ़ान का सामना करेंगे। वरिष्ठ नेता ने मुसलमान देशों पर फ़िलिस्तीनियों के प्रति समर्थन में गंभीरता को सिद्ध करने के लिए इस्राईल से सभी कूटनैतिक व आर्थिक संबंध विच्छेद करने पर बल दिया। वरिष्ठ नेता ने फ़िलिस्तीन को विभाजित करने वाले किसी भी सुझाव को रद्द करते हुए कहा कि जो चीज़ फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को सुनिश्चित करेगी वह जार्डन नदी से लेकर भूमध्य सागर तक वास्तविक रूप में पूरी फ़िलिस्तीनी ज़मीन की स्वतंत्रता है न कि फ़िलिस्तीन की ज़मीन के एक भाग की स्वतंत्रता। उन्होंने कहा कि दो सरकार की योजना फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के अधिकारों की अनदेखी व 1948 के फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को ख़तरे में डालने तथा फ़िलिस्तीन के अत्याचारग्रस्त राष्ट्र के कई दशकों की पीड़ाओं की पुनरावृत्ति के अर्थ में है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के जनमत संग्रह का उपाय पेश करता है क्योंकि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को अपने भविष्य निर्धारण का अधिकार है। इस जनमत संग्रह में मुसलमान व ईसाई समेत सभी फ़िलिस्तीनी पक्ष लें न कि विदेशी पलायनकर्ता। ज्ञात रहे तेहरान में आयोजित पांचवें अंतर्राष्ट्रीय फ़िलिस्तीनी इंतेफ़ाज़ा सम्मेलन में फ़िलिस्तीनियों के अपनी मात्रभूमि लौटने व अपने भविष्य के निर्धारण सहित फ़िलिस्तीनियों के सभी अधिकार तथा इस्राईल द्वारा अतिग्रहित फ़िलिस्तीन को स्वतंत्रत कराने के विषय पर चर्चा हो रही है।
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